बिलासपुर। राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी और निजी भूमि को रिकॉर्ड से गायब करने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम दो मोहनी, पटवारी हल्का नंबर 24 में वर्ष 2014 के दौरान पदस्थ रहे शासकीय सेवक इंद्र कुमार सिंह के खिलाफ शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, स्वर्गीय गिरधारी लाल अग्रवाल की निजी भूमि खसरा क्रमांक 74/1 एवं 74/2, जिसका रकबा क्रमशः 0.053 हेक्टेयर और 0.057 हेक्टेयर बताया गया है, को कथित रूप से शासकीय अभिलेखों से गायब कर दिया गया।
काट-छांट और ओवरराइटिंग का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित पटवारी ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए खसरा क्रमांक 74/1 एवं 74/2 के रिकॉर्ड में काट-छांट कर उसे दूसरे खसरा क्षेत्र में सम्मिलित कर दिया। इसके साथ ही वर्ष 2001-02 से 2005 के बीच के राजस्व अभिलेखों में खसरा क्रमांक 76 के रकबे से संबंधित रिकॉर्ड में भी कथित रूप से काट-छांट और ओवरराइटिंग की गई।
आरोप है कि वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में दोनों खसरों की भूमि खसरा क्रमांक 76 में दर्शाई जा रही है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता और भूमि स्वामित्व से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
अपनी ही जमीन के लिए दर-दर भटक रहे वारिस
शिकायतकर्ता के मुताबिक कथित रिकॉर्ड हेराफेरी के कारण मूल भूमि स्वामी स्वर्गीय गिरधारी लाल अग्रवाल के वारिस अपनी भूमि के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मामले में मांग की गई है कि पुराने राजस्व अभिलेखों, वर्तमान रिकॉर्ड, खसरा पंचसाला, नामांतरण एवं अन्य संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही रिकॉर्ड में यदि किसी स्तर पर अनियमितता अथवा छेड़छाड़ पाई जाती है तो उसे नियमानुसार दुरुस्त कर मूल भूमि स्वामी के वैध वारिसों को उनका अधिकार दिलाया जाए।
जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का मिलान कराने तथा रिकॉर्ड में हुई कथित काट-छांट और ओवरराइटिंग की जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोष सिद्ध होने पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि खसरा 74/1 और 74/2 की भूमि आखिर रिकॉर्ड में खसरा 76 तक कैसे पहुंची? क्या पुराने राजस्व अभिलेखों में वास्तव में काट-छांट हुई है? और यदि हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष राजस्व जांच के बाद ही सामने आएगा।
नोट: खबर शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना बाकी है। संबंधित पटवारी/अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।






