मोटरसाइकिल से ट्रक तक काटने का आरोप, रातोंरात गायब हो जाते हैं वाहनों के पुर्जे! क्या पुलिस अधीक्षक करेंगे निर्णायक कार्रवाई?
बिलासपुर। तिफरा से सरगांव तक फैले कबाड़ कारोबार को लेकर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में संचालित कबाड़ दुकानों के बीच कुछ कारोबारियों की गतिविधियों को लेकर चोरी के वाहनों की कटाई और संदिग्ध कबाड़ की खरीद-बिक्री की शिकायतें गंभीर चिंता का विषय हैं। आरोप है कि मोटरसाइकिल से लेकर बड़े-बड़े ट्रकों तक को काटकर उनके पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं। यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है, तो यह वाहन चोरी के अपराधों से जुड़े नेटवर्क का गंभीर मामला हो सकता है।
रात के अंधेरे में कटते वाहन, सुबह तक मिट जाते हैं सबूत?
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, कुछ कबाड़ कारोबारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छोटे कबाड़ियों से कबाड़ खरीदते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस कारोबार की आड़ में चोरी के वाहनों के पुर्जे भी खपाए जा सकते हैं। यदि किसी चोरी के वाहन को काटकर उसके इंजन, चेसिस और अन्य महत्वपूर्ण हिस्से अलग-अलग कर दिए जाएं, तो वाहन की पहचान और बरामदगी पुलिस के लिए चुनौती बन सकती है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या तिफरा से सरगांव तक संचालित कबाड़ दुकानों में खरीदे और काटे जाने वाले वाहनों की नियमित जांच होती है? क्या प्रत्येक वाहन के वैध स्वामित्व और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है? यदि नहीं, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
पहले भी हुई कार्रवाई, फिर दोबारा कैसे जम जाता है कारोबार?
स्थानीय स्तर पर इन कारोबारियों के विरुद्ध पूर्व में पुलिस कार्रवाई होने की बातें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद यदि संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो यह जांच का विषय है कि पूर्व की कार्रवाई का वास्तविक परिणाम क्या रहा। क्या कार्रवाई के बाद दोबारा निरीक्षण किया गया? क्या पुराने मामलों में जब्त वाहनों और पुर्जों की जांच पूरी हुई? क्या किसी संगठित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया गया?
अगर कार्रवाई केवल छापेमारी और जब्ती तक सीमित रह जाए तथा कुछ समय बाद वही गतिविधियां फिर शुरू होने लगें, तो अपराध पर स्थायी अंकुश कैसे लगेगा? पुलिस प्रशासन को इन सवालों का जवाब जांच और ठोस कार्रवाई के जरिए देना होगा।
एसपी साहब! अब केवल छापेमारी नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी
तिफरा से सरगांव तक फैले इस कारोबार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक को विशेष जांच अभियान चलाने की जरूरत है। संबंधित थाना क्षेत्रों की संयुक्त टीम बनाकर सभी संदिग्ध कबाड़ दुकानों का सत्यापन कराया जाए। खरीद-बिक्री के रजिस्टर, वाहनों के इंजन एवं चेसिस नंबर, परिवहन दस्तावेज, कबाड़ की आपूर्ति करने वालों और संदिग्ध पुर्जों के स्रोत की जांच की जाए।
इसके साथ ही, पूर्व में हुई पुलिस कार्रवाइयों और दर्ज मामलों की समीक्षा कर यह पता लगाया जाए कि कहीं कार्रवाई के बाद उन्हीं गतिविधियों की पुनरावृत्ति तो नहीं हो रही है। जहां चोरी के वाहन या अवैध गतिविधियों के प्रमाण मिलें, वहां संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। नियमों के तहत आवश्यक होने पर कारोबार बंद कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जाए।
आखिर कब टूटेगा संदिग्ध कबाड़ कारोबार का नेटवर्क?
वाहन चोरी आम नागरिकों की मेहनत की कमाई पर सीधा प्रहार है। यदि चोरी के वाहनों को काटकर उनके पुर्जे बाजार में खपाए जाते हैं, तो इससे अपराधियों के हौसले बढ़ सकते हैं और वाहन चोरी के मामलों में बरामदगी कठिन हो सकती है। इसलिए इस मामले को सामान्य कबाड़ कारोबार मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक पर हैं। क्या तिफरा से सरगांव तक संदिग्ध कबाड़ कारोबार की व्यापक जांच होगी? क्या पूर्व में हुई कार्रवाइयों की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाएगी? और क्या चोरी के वाहनों की कटाई में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ ऐसी वैधानिक कार्रवाई होगी, जिससे इस तरह की गतिविधियों पर स्थायी अंकुश लग सके?
क्षेत्र में उठ रहे इन सवालों का जवाब अब ठोस जांच और परिणाममूलक कार्रवाई से ही मिल सकता है।





