20 लाख की रावण दहन निविदा पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले ही दिन निगम ने निकाला निरस्तीकरण आदेश, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले—सवाल उठे तो बदलना पड़ा फैसला
बिलासपुर। साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन के लिए करीब 20 लाख रुपए की निविदा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। जिला कांग्रेस कमेटी शहर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के ठीक अगले दिन नगर पालिक निगम बिलासपुर ने कार्यालयीन निविदा क्रमांक-29, दिनांक 28 सितंबर 2026 को निरस्त करने की सूचना अखबारों में प्रकाशित कर दी।
नगर निगम के जोन क्रमांक-7 के कार्यपालन अभियंता द्वारा जारी सूचना में कहा गया है कि उक्त निविदा को “अपरिहार्य कारणों” से निरस्त किया जाता है। हालांकि, निरस्तीकरण के पीछे स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
इधर, कांग्रेस ने इसे अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुआ बड़ा घटनाक्रम बताते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“विरोध के बाद घबराहट में अब गलती सुधारने की कोशिश”
जिला कांग्रेस कमेटी शहर के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने निविदा निरस्त होने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस द्वारा सवाल उठाए जाने और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद अगले ही दिन निविदा निरस्त किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विरोध और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद घबराहट में अब सुधार करने का प्रयास किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं अपनी गलती को सुधारने की कोशिश की गई है।
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि यदि निविदा पूरी तरह नियमानुसार और उचित थी, तो उसे अचानक “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देकर निरस्त करने की जरूरत क्यों पड़ी? निगम को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन-सी अपरिहार्य परिस्थिति सामने आई, जिसके कारण निविदा निरस्त करनी पड़ी।
20 लाख की निविदा पर उठे सवाल, फिर निरस्तीकरण—कांग्रेस ने मांगा जवाब
गौरतलब है कि कांग्रेस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में रावण दहन के लिए जारी करीब 20 लाख रुपए की निविदा पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने दावा किया था कि इसमें रावण के पुतले, आतिशबाजी, टेंट और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर बड़ी राशि निर्धारित की गई है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाया था कि इतनी बड़ी राशि किस आधार पर तय की गई और क्या इसके लिए नियमानुसार एमआईसी की स्वीकृति ली गई थी?
अब उसी निविदा के निरस्त होने के बाद कांग्रेस ने निगम से पूछा है कि अगर सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो निविदा निरस्त करने की नौबत क्यों आई?
“अपरिहार्य कारण” क्या है? निगम बताए—कांग्रेस
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि केवल निविदा निरस्त कर देना पर्याप्त नहीं है। निगम को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि—
**निविदा निरस्त करने का वास्तविक कारण क्या है?
**क्या निविदा प्रक्रिया में कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी थी?
**क्या पहले निर्धारित करीब 20 लाख रुपए की लागत पर पुनर्विचार किया जाएगा?
**क्या नई निविदा जारी की जाएगी?
**यदि नई निविदा जारी होगी तो उसकी अनुमानित लागत कितनी होगी?
**पहले की निविदा तैयार करने और स्वीकृत करने की प्रक्रिया में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे?
कांग्रेस का कहना है कि जनता के पैसों से होने वाले आयोजन में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
अब असली सवाल—निविदा क्यों निकली और क्यों निरस्त हुई?
कांग्रेस ने कहा कि कल तक जिस निविदा को लेकर निगम की ओर से कोई स्पष्टता नहीं थी, कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अगले ही दिन उसका निरस्तीकरण सामने आना अपने आप में महत्वपूर्ण है।
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले पर नजर रखेगी और जनता के पैसे के इस्तेमाल से जुड़े हर सवाल का जवाब मांगेगी।
20 लाख रुपए की निविदा से शुरू हुआ विवाद अब उसके निरस्तीकरण तक पहुंच चुका है। निगम ने भले ही इसे “अपरिहार्य कारणों” से निरस्त बताया है, लेकिन उन अपरिहार्य कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। ऐसे में अब कांग्रेस के सवालों के बाद नगर निगम का अगला कदम और उसका स्पष्टीकरण ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेगा।






