साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन के नाम पर 20 लाख की निविदा ने खड़े किए कई सवाल, कांग्रेस बोली—आखिर किसकी मंजूरी से तय हुआ इतना बड़ा बजट?
बिलासपुर। साइंस कॉलेज मैदान में होने वाले रावण दहन को लेकर बिलासपुर की सियासत गरमा गई है। नगर निगम द्वारा रावण दहन आयोजन के लिए करीब 20 लाख रुपए की निविदा जारी किए जाने के बाद जिला कांग्रेस कमेटी शहर ने इसे लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने निविदा की लागत, प्रक्रिया और स्वीकृति को लेकर पारदर्शिता की मांग करते हुए पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने पत्रकार वार्ता में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि रावण दहन की 20 लाख रुपए की निविदा की जानकारी महापौर पूजा विधानी तक को नहीं है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि महापौर को ही इसकी जानकारी नहीं है, तो क्या इस आयोजन का प्रस्ताव एमआईसी के सामने रखा गया था? क्या नियमानुसार इसकी स्वीकृति ली गई?
20 लाख में क्या-क्या होगा? कांग्रेस ने मांगा हिसाब
कांग्रेस के मुताबिक निविदा में करीब 6 लाख रुपए रावण के पुतले, 4 लाख रुपए आतिशबाजी और लगभग 10 लाख रुपए टेंट एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए खर्च होने की बात सामने आ रही है।
यही आंकड़े अब विवाद का सबसे बड़ा कारण बन गए हैं। सिद्धांशु मिश्रा ने दावा किया कि सामान्य तौर पर करीब 50 से 60 हजार रुपए में रावण का पुतला तैयार हो सकता है, जबकि आतिशबाजी समेत पूरा आयोजन करीब 3.50 लाख रुपए तक में कराया जा सकता है।
ऐसे में कांग्रेस ने सवाल किया है कि आखिर 20 लाख रुपए का बजट किस आधार पर तैयार किया गया?
‘रावण से बड़ा सवाल 20 लाख की निविदा’
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मामला केवल रावण दहन का नहीं, बल्कि जनता के पैसे के इस्तेमाल और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता का है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि यदि नगर निगम के पास शहर की मूलभूत सुविधाओं के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और सड़क, नाली, सफाई तथा स्ट्रीट लाइट जैसे कार्य लंबित हैं, तो इतनी बड़ी राशि को आयोजन पर खर्च करने के बजाय विकास कार्यों में लगाया जाना चाहिए।
एक और सवाल—सिर्फ एक जगह आयोजन क्यों?
कांग्रेस ने नगर निगम के क्षेत्राधिकार को लेकर भी सवाल उठाया है। कांग्रेस का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में बिलासपुर विधानसभा के साथ बेलतरा, बिल्हा, मस्तूरी और तखतपुर विधानसभा क्षेत्रों के हिस्से भी आते हैं।
ऐसे में सवाल उठाया गया कि यदि नगर निगम अपने स्तर पर रावण दहन का आयोजन करा रहा है, तो निगम क्षेत्र से जुड़े सभी हिस्सों में समान व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?
कांग्रेस ने मांगा पूरा हिसाब
जिला कांग्रेस कमेटी ने नगर निगम से मांग की है कि रावण दहन की निविदा से जुड़ी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। कांग्रेस ने विशेष रूप से पूछा है कि—
***20 लाख रुपए की लागत किस आधार पर तय की गई?
**रावण के पुतले की लागत कितनी निर्धारित की गई?
**आतिशबाजी पर कितनी राशि खर्च होगी?
**टेंट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए कितना बजट रखा गया?
**क्या इस प्रस्ताव को एमआईसी के समक्ष रखा गया?
**क्या नियमानुसार स्वीकृति ली गई?
**निविदा किस प्रक्रिया के तहत जारी की गई?
**आयोजन समाप्त होने के बाद वास्तविक खर्च कितना हुआ?
कांग्रेस ने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले किसी भी आयोजन में पारदर्शिता सबसे जरूरी है।
अब 20 लाख रुपए की इस निविदा पर उठे सवालों के बीच नगर निगम का आधिकारिक जवाब क्या आता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि यदि सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाएगी






