देश को ऊर्जा देने वाली कंपनी पर बार-बार क्यों उठते हैं भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप?
बिलासपुर। देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में स्थित SECL एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह उत्पादन का नया रिकॉर्ड नहीं, बल्कि पिछले दो दशकों में सामने आए वे मामले हैं जिनमें कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और परिवहन नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगे, जांच हुई और कई मामलों में केंद्रीय एजेंसियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
तत्कालीन CMD स्तर से लेकर क्षेत्रीय अधिकारियों तक, रिश्वतखोरी, कोयला गबन, फर्जी भुगतान, टेंडर अनियमितता, आय से अधिक संपत्ति और भूमि अधिग्रहण विवाद जैसे मामलों ने समय-समय पर SECL की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
जनता पूछ रही है कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो बार-बार CBI, ED, Vigilance और न्यायालयों तक मामले क्यों पहुंचते हैं?
विश्रामपुर कोयला गबन मामला, फर्जी मजदूर भुगतान प्रकरण, अतिरिक्त भुगतान मामले, परिवहन घोटाले और हाल के आय से अधिक संपत्ति मामलों ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर निगरानी तंत्र में खामियां कहां हैं।
कोयले से अरबों की कमाई, लेकिन प्रभावित गांवों में नाराजगी
सरगुजा, कोरबा, रायगढ़ और बिलासपुर संभाग के कई खनन प्रभावित क्षेत्रों में आज भी रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर असंतोष देखने को मिलता है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीनों से निकला कोयला देश को रोशन कर रहा है, लेकिन उनके गांवों की समस्याएं जस की तस हैं।
ठेकेदारी व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
खनन, परिवहन और अन्य कार्यों से जुड़े ठेकों को लेकर समय-समय पर पक्षपात, मिलीभगत और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। कई मामलों में जांच एजेंसियों ने भी संज्ञान लिया है।
जनता जानना चाहती है
** पिछले 20 वर्षों में कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
**कितने मामलों में विभागीय जांच पूरी हुई?
**कितने मामलों में दोष सिद्ध हुआ?
**खदान प्रभावित परिवारों को कितना रोजगार मिला?
**परिवहन और डिस्पैच व्यवस्था कितनी पारदर्शी है?
**उठ रही श्वेत पत्र की मांग
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि SECL पिछले दो दशकों के सभी प्रमुख विवादों, जांचों, विभागीय कार्रवाइयों और वित्तीय अनियमितताओं पर एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी करे, ताकि जनता के सामने पूरी तस्वीर आ सके।
देखा जा रहा है कि SECL केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और देश की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए उपलब्धियों के साथ-साथ जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। जनता का सवाल सीधा है—यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो आरोपों और जांचों की लंबी सूची आखिर क्यों है?
“कोयले की काली परतों के नीचे दबी सच्चाई को सामने लाना अब केवल पत्रकारिता नहीं, बल्कि जनहित का विषय बन चुका है।”





